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Happy Birthday Gulzar: 89 के हुए गुलज़ार, जन्मदिन पर पढ़ें रिश्तों, दिलों के जज्बातों को बयां करती उनकी कुछ कविताएं

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हाइलाइट्स

आज मशहूर गीतकार, कवि गुलज़ार अपना 89वां जन्मदिन मना रहे हैं.
उन्होंने अपने करियर में कई मशहूर कविताएं, रचनाएं लिखी हैं, जिनमें कुछ रिश्तों के दर्द को भी बयां करते हैं.

Happy Birthday Gulzar: गुलज़ार को किसी परिचय की दरकार नहीं है. उनका नाम जुंबा पर आते ही दिल को छू जाने वाले कई गीतों को लोग खुद ब खुद गुनगुनाने लगते हैं. मशहूर लेखक, शायर, पटकथा लेखक, गीतकार, कवि गुलज़ार ने एक से बढ़कर एक गीत लिखे हैं. कविताएं रची हैं, जो लोगों के दिलो-दिमाग में बसी हुई हैं. आज गुलज़ार साहब का जन्मदिन है. आज वे अपना 89वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं. पाकिस्तान में जन्मे गुलज़ार को छोटी सी उम्र से ही कविताएं लिखने का शौक था. उनकी रचनाएं मुख्य रूप से हिंदी, पंजाबी, उर्दू में होती हैं. हालांकि, उन्होंने कई अन्य क्षेत्रीय भाषा में भी रचनाएं लिखी हैं. उनकी पर्सनल लाइफ की बात करें तो एक्ट्रेस राखी से उनकी शादी अच्छी नहीं चली और 1 साल में ही दोनों की राहें जुदा हो गईं. हालांकि, गुलज़ार ने राखी से तलाक नहीं लिया और तब से लेकर आज तक वे अकेले ही जीवन जी रहे हैं. शायद यही वजह है कि उनकी कई कविताओं में रिश्तों के टूटने-जुड़ने, बिखरने और प्यार की खुशबू, मोहब्बत में मिला दर्द महसूस होता है. उनके जन्मदिन पर आप भी पढ़ें गुलज़ार द्वारा लिखी गई रिश्तों पर अधारित कुछ मशहूर कविताएं.

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं
कुछ इक पल के
कुछ दो पल के

कुछ परों से हल्के होते हैं
बरसों के तले चलते-चलते
भारी-भरकम हो जाते हैं

कुछ भारी-भरकम बर्फ़ के-से
बरसों के तले गलते-गलते
हल्के-फुल्के हो जाते हैं

नाम होते हैं रिश्तों के
कुछ रिश्ते नाम के होते हैं
रिश्ता वह अगर मर जाए भी
बस नाम से जीना होता है

बस नाम से जीना होता है
रिश्ते बस रिश्ते होते हैं .

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ज़िंदगी यूं हुई बसर तन्हा

ज़िंदगी यूं हुई बसर तन्हा
क़ाफिला साथ और सफ़र तन्हा

अपने साये से चौंक जाते हैं
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा

रात भर बोलते हैं सन्नाटे
रात काटे कोई किधर तन्हा

दिन गुज़रता नहीं है लोगों में
रात होती नहीं बसर तन्हा

हमने दरवाज़े तक तो देखा था
फिर न जाने गए किधर तन्हा.

प्यार वो बीज है

प्यार कभी इकतरफ़ा होता है, न होगा
दो रूहों के मिलन की जुड़वां पैदाइश है ये
प्यार अकेला नहीं जी सकता
जीता है तो दो लोगों में
मरता है तो दो मरते हैं.

प्यार इक बहता दरिया है
झील नहीं कि जिसको किनारे बांध के बैठे रहते हैं
सागर भी नहीं कि जिसका किनारा नहीं होता
बस दरिया है और बह जाता है.

प्यार एक ज़िस्म के साज़ पर बजती गूंज नहीं है
न मन्दिर की आरती है न पूजा है
प्यार नफा है न लालच है
न कोई लाभ न हानि कोई
प्यार हेलान हैं न एहसान है.

बीते रिश्ते तलाश करती है

बीते रिश्ते तलाश करती है
ख़ुशबू ग़ुंचे तलाश करती है

जब गुज़रती है उस गली से सबा
ख़त के पुर्ज़े तलाश करती है

अपने माज़ी की जुस्तुजू में बहार
पीले पत्ते तलाश करती है

एक उम्मीद बार-बार आ कर
अपने टुकड़े तलाश करती है

बूढ़ी पगडंडी शहर तक आ कर
अपने बेटे तलाश करती है.

(साभार: कविताकोश डॉट ओआरजी)

न जाने क्या था, जो कहना था

न जाने क्या था, जो कहना था
आज मिल के तुझे
तुझे मिला था मगर, जाने क्या कहा मैंने

वो एक बात जो सोची थी तुझसे कह दूंगा
तुझे मिला तो लगा, वो भी कह चुका हूं कभी
जाने क्या, ना जाने क्या था
जो कहना था आज मिल के तुझे

कुछ ऐसी बातें जो तुझसे कही नहीं हैं मगर
कुछ ऐसा लगता है तुझसे कभी कही होंगी
तेरे ख़याल से ग़ाफ़िल नहीं हूं तेरी क़सम
तेरे ख़यालों में कुछ भूल-भूल जाता हूं
जाने क्या, ना जाने क्या था जो कहना था
आज मिल के तुझे जाने क्या…

दिल का रसिया और कहां होगा

दिल का रसिया और कहां होगा
इश्क की आग का धुआं जहां होगा

पीड़ा पाले ग़म सहलाए
कैसे-कैसे जी बहलाए
बावरा है, भला मना कहां होगा…

रुखे-सूखे तिनके रखना
फूंकना और चिनगारियां चखना
भोगी है, जोगी ये, चैन कहां होगा…

(साभार: हिंदीपोयम डॉट ओआरजी)

Tags: Lifestyle, Lyricist Gulzar, Poet, Relationship


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