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Friendship Day 2023 Poem: दोस्त बहुत याद आते हैं..मशहूर कवियों की कविताओं के साथ, दोस्‍तों को कहें दोस्‍ती मुबारक

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Friendship Day 2023: दोस्‍ती निभाने का कोई खास दिन नहीं होता. ये रिश्‍ता पूरी जिंदगी एक समान ही रहता है, लेकिन अगर आप अपने दोस्‍तों को यह बताना चाहते हैं कि उनके लिए आपके दिल में क्‍या भावनाएं हैं तो फ्रेंडशिप डे से बढ़िया कोई और दिन नहीं हो सकता. यारी दोस्‍ती के नाम अगर आप कुछ कविताएं अपने दोस्‍तों को शेयर करेंगे तो उन्‍हें तो अच्‍छा लगेगा ही, आपकी दोस्‍ती को मजबूती भी मिलेगी. तो आइए आज ‘फ्रेंडशिप डे’ के मौके पर अपने दोस्‍तों को फेमस कवियों की कविताएं शेयर करें.

फ्रेंडशिप डे पर दोस्तों को भेजें दोस्‍ती पर कविताएं

डॉ. हरिवंश राय बच्चन की कविता-
मैं यादों का पिटारा खोलू तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
मैं गांव की गलियों से गुजरू,
पेड़ की छांव में बैठूं तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
वो हंसते मुस्कुराते दोस्त
ना जानें किस शहर में गुम हो गए,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
कोई मैं में उलझा है तो कोई तू उलझा है,
नहीं सुलझ रही है अब इस जीवन की गुत्थी,
अब दोस्त बहुत याद आते हैं.
जब मैं मनाता हूं कोई त्यौहार
तो हंसते गाते दोस्त नजर आते हैं,
लेकिन अब तो होली, दिवाली भी मिलना नहीं होता.
कोई पैसा कमाने में व्यस्त है
तो कोई परिवार चलाने में व्यस्त है,
याद करता हूं पुराने दिन तो
कुछ दोस्त बहुत याद आते है.

वन्दना शर्मा की दोस्‍ती पर कविता
दोस्ती है अनमोल रत्न,
नहीं तोल सकता जिसे कोई धन,
सच्ची दोस्ती जिसके पास है,
उसके पास दौलत की भरमार है,
न ही जीत न ही कोई हार है,
दोस्त के दिल में तो बस प्यार ही प्यार है.
भटके जब भी दोस्त संसार के मोहजाल में,
खींच लाता है सच्चा दोस्त उसे अच्छाई के प्रकाश में,
छोड़ देता है जग सारा जब मुश्किल भरी राह में,
सच्चा दोस्त साथ देता है तब जिंदगी की राह में.
बने चाहे दुश्मन क्यों न जमाना सारा,
सच्चा दोस्त साथ देता है सदा हमारा,
दोस्त के लिए कुर्बान होता है जीवन सारा,
हर मुश्किल में बनता है वो सहारा.
सच्ची दोस्ती को वक्त परखता हर बार है,
वक्त की हर परीक्षा से हसते हुए पास करना ही दोस्ती की पहचान है,
दुनिया की किसी शौहरत की न जिसे दरकार है,
सच्चा दोस्त रखने वाला संसार में सबसे धनवान है.

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नरेंद्र वर्मा की दोस्‍ती पर कविता
मैं ना जानूं दोस्त तेरे दूर हो जाने के बाद,
यह जिंदगी कैसे जंग बन गई है.
मैं ना जानूं दोस्त तेरे जाने के बाद,
यह गांव की गलियां कैसे सुनी हो गई है.
मैं ना जानूं दोस्त तेरे जाने के बाद,
वो खेल का मैदान अब सुना लगता है.
मैं ना जानूं दोस्त तेरे जाने के बाद,
कैसे फूल जैसी जिंदगी पत्थर बन गई है.
खुद को मनाने की कोशिश करता हूं बहुत,
लेकिन क्या करूं दिल है कि मानता ही नहीं.
मैं ना जानूं दोस्त तेरे दूर हो जाने के बाद,
मेरे चेहरे की हंसी कहां गुम हो गई.
मैं ना जानूं दोस्त तेरे जाने के बाद,
बाजारों की रौनक भी फीकी लगती है.
तू कब आएगा मेरे भाई मेरे दोस्त,
तेरे को हर दिन गले लगाने का मन करता है.

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नरेंद्र वर्मा की दोस्‍ती पर कविता
वो दोस्त ना जानें कहां गुम हो गया,
बचपन में जो मेरे संग खेला करता था,
जो बारिश में मेरे संग भीगा करता था.
ना जानें वो दोस्त कहां गुम हो गया,
जब मेरे संग गांव की गलियों में खूब खेला करता था,
जिसके संग जिंदगी जिया करते थे.

ना जानें वो दोस्त कहां गुम हो गया,
जिसको सब कुछ बता दिया करता था,
जिसके संग खूब हंसी ठिठोली किया करता था.
ना जानें वो दोस्त कहां गुम हो गया
जिसके संग स्कूल जाया करता था,
जिसके संग खाना बांटा करता था.

ना जानें वो दोस्त कहां गुम हो गया,
जिसके संग गोलगप्पे खाया करता था,
जिसके संग मेला देखने जाया करता था.

ना जानें वो दोस्त कहां गुम हो गया,
जिसके संग बाजारों में घूमा करता था,
जिसके संग फिल्में देखा करता था.
ना जानें वो दोस्त कहां गुम हो गया,
जिसकी एक आवाज पर दिल झूम उठता था,
जिसके संग हर पल खुश रहता था.
ना जानें वो दोस्त कहां गुम हो गया,
जो दोस्ती निभाने का वादा करता था,
जो दोस्त नहीं भाई बोला करता था.

लोकेश इंदौरा की दोस्‍ती पर कविता
दूध पानी जैसा यारा अपना दोस्ताना,
देकर जोर से धक्का काम हैं उठाना.

उठना गिरना चलना दोस्ती के संग,
रुलाकर बिखरेंगे अप्रैल फूल के रंग.

रंगों से सराबोर होता अपना मेल मिलाप,
नईं जिल्द मे लिपटें पुरानी यादों की किताब.

किताब का हर पन्ना मौज मस्ती की कहें कहानी,
लिखा किस चेहरें को देख तेरे मुंह मे था पानीं.

पानीं जिस गम से आए वह गम भी हमें ब़ताना,
काम होगा हमारा तुरन्त उसे हरिद्वार पहुचाना.

पहुंच कहीं ना पाओ तो बेझिझक मांगना साथ,
बैलगाड़ी, साईकिल, जो भी हो, लाएंगे हाथों हाथ.

हाथ तुम्हारें कालें कर गईं यदि कोई दलाली.
गवाहीं हम देगें यह तो इसकी GF की लाली.

लालीं कर दे ब्रेकअप तो ना होना तुम उदास.
शादी करवाके तुम्हारी बनाएंगे बीवी का दास.

दास होना शर्मं की नहीं, सम्मान की बात समझना.
था ख्वाब हमारा कभीं तुम्हें इंटेलिजेट में बदलना.

बदलना नहीं रंग अपना तुम बन के भीगी बिल्ली.
याद रखना ताली बजा के उड़ाएगें हम ख़िल्ली.

खिल्ली खिलखिलाहट संग काटेंगे तेरा बर्थ केक,
खुशी देख तितलियां मक्खियां भी देंगी तुझे डेट.
डेट ओफ मैरिज पे मोमबत्ती की जगह रखेंगे पटाख़ा,
वाइफ संग काटना तुम केक, हम जला के करेंगे धमाक़ा.

धमाका हैं दोस्ती, दोस्ती हैं दिवाली,
रंगों से भरी शैतानी, दिये से भोली भाली.

(साभार:हिन्‍दी पोयम डॉट कॉम)

Tags: Friend, Friendship Day, Lifestyle, Relationship


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